श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 59-60
 
 
श्लोक  1.19.59-60 
नाग्निर्दहति नैवायं शस्त्रैश्छिन्नो न चोरगै:।
क्षयं नीतो न वातेन न विषेण न कृत्यया॥ ५९॥
न मायाभिर्न चैवोच्चात्पातितो न च दिग्गजै:।
बालोऽतिदुष्टचित्तोऽयं नानेनार्थोऽस्ति जीवता॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
देखो, न तो इसे अग्नि ने जलाया, न शस्त्रों ने काटा, न सर्पों ने इसे नष्ट किया, न वायु, विष या जादू से इसे दुर्बल किया गया, न माया से, न ऊपर से गिराने से, न दैत्यों ने इसे मारा। यह बालक बड़ा दुष्टबुद्धिवाला है, अब इसके जीवन का कोई उपयोग नहीं है ॥59-60॥
 
See, neither fire burnt him, nor was he cut by weapons, nor was he destroyed by snakes, nor was he weakened by wind, poison or witchcraft, nor was he killed by illusions, by being thrown from above or by giants. This child is very evil-minded, now there is no use of his life. ॥ 59-60॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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