श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  1.19.55 
श्रीपराशर उवाच
ततस्ते सत्वरा दैत्या बद्‍ध्वा तं नागबन्धनै:।
भर्तुराज्ञां पुरस्कृत्य चिक्षिपु: सलिलार्णवे॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले - तब उन दैत्यों ने अपने स्वामी की आज्ञा मानकर तुरन्त ही उन्हें सर्प के पाश से बाँधकर समुद्र में फेंक दिया।
 
Sri Parashara said - Then those demons obeyed their master's command and immediately tied him with a serpent's noose and threw him into the ocean.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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