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श्लोक 1.19.51  |
उवाच च स कोपेन सामर्ष: प्रज्वलन्निव।
निष्पिष्य पाणिना पाणिं हन्तुकामो जगद्यथा॥ ५१॥ |
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| अनुवाद |
| और क्रोध और क्षोभ से जलते हुए वह हाथ मलता हुआ ऐसा बोलने लगा मानो वह सम्पूर्ण जगत् को मार डालेगा ॥51॥ |
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| And burning with anger and resentment, he rubbed his hands and spoke as if he would kill the entire world. ॥ 51॥ |
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