श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  1.19.50 
श्रीपराशर उवाच
एतच्छ्रुत्वा तु कोपेन समुत्थाय वरासनात्।
हिरण्यकशिपु: पुत्रं पदा वक्षस्यताडयत्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले: यह सुनकर हिरण्यकशिपु क्रोधित होकर अपने सिंहासन से उठा और अपने पुत्र प्रह्लाद की छाती पर लात मारी।
 
Sri Parashara said: On hearing this, Hiranyakashipu angrily got up from his throne and kicked his son Prahlada on the chest.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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