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श्लोक 1.19.5  |
अन्येषां यो न पापानि चिन्तयत्यात्मनो यथा।
तस्य पापागमस्तात हेत्वभावान्न विद्यते॥ ५॥ |
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| अनुवाद |
| जो मनुष्य अपने समान दूसरों का बुरा नहीं सोचता, हे प्रिय! उसका कभी कोई अनिष्ट नहीं होता, क्योंकि उसका कोई कारण ही नहीं है ॥5॥ |
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| A person who does not think ill of others like himself, O dear!, no harm ever happens to him because there is no reason for it. ॥ 5॥ |
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