श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.19.5 
अन्येषां यो न पापानि चिन्तयत्यात्मनो यथा।
तस्य पापागमस्तात हेत्वभावान‍्न विद्यते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अपने समान दूसरों का बुरा नहीं सोचता, हे प्रिय! उसका कभी कोई अनिष्ट नहीं होता, क्योंकि उसका कोई कारण ही नहीं है ॥5॥
 
A person who does not think ill of others like himself, O dear!, no harm ever happens to him because there is no reason for it. ॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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