vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान्का सुदर्शनचक्रको भेजना
»
श्लोक 47
श्लोक
1.19.47
देवा मनुष्या: पशव: पक्षिवृक्षसरीसृपा:।
रूपमेतदनन्तस्य विष्णोर्भिन्नमिव स्थितम्॥ ४७॥
अनुवाद
देवता, मनुष्य, पशु, पक्षी, वृक्ष और सरीसृप - ये सभी भगवान विष्णु से भिन्न होते हुए भी साक्षात् श्री अनन्त के ही रूप हैं ॥47॥
Gods, humans, animals, birds, trees and reptiles – all these, despite being different from Lord Vishnu, are actually forms of Shri Anant. 47॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×