श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  1.19.47 
देवा मनुष्या: पशव: पक्षिवृक्षसरीसृपा:।
रूपमेतदनन्तस्य विष्णोर्भिन्नमिव स्थितम्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
देवता, मनुष्य, पशु, पक्षी, वृक्ष और सरीसृप - ये सभी भगवान विष्णु से भिन्न होते हुए भी साक्षात् श्री अनन्त के ही रूप हैं ॥47॥
 
Gods, humans, animals, birds, trees and reptiles – all these, despite being different from Lord Vishnu, are actually forms of Shri Anant. 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)