श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  1.19.46 
तस्माद्यतेत पुण्येषु य इच्छेन्महतीं श्रियम्।
यतितव्यं समत्वे च निर्वाणमपि चेच्छता॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
अतः जो महान् ऐश्वर्य चाहता है, उसे केवल पुण्य संचय का ही प्रयत्न करना चाहिए; और जो मोक्ष चाहता है, उसे भी समता प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए ॥ 46॥
 
Therefore, one who desires great prosperity should strive only to accumulate virtues; and one who desires liberation should also strive to attain equanimity. ॥ 46॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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