श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  1.19.45 
जडानामविवेकानामशूराणामपि प्रभो।
भाग्यभोज्यानि राज्यानि सन्त्यनीतिमतामपि॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! मूर्ख, मूर्ख, दुर्बल और दुराचारी मनुष्य भी संयोगवश ही नाना प्रकार के सुख और राज्य प्राप्त करते हैं ॥ 45॥
 
O Lord! Even the dull, the unwise, the weak and the immoral get various kinds of pleasures and kingdoms by chance. ॥ 45॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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