श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.19.4 
न मन्त्रादिकृतं तात न च नैसर्गिको मम।
प्रभाव एष सामान्यो यस्य यस्याच्युतो हृदि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
"पिताजी! मेरा यह प्रभाव न तो किसी मन्त्र या अन्य मन्त्रों के कारण है और न ही यह स्वाभाविक है, अपितु जिसके हृदय में भगवान श्री अच्युत निवास करते हैं, उसके लिए यह सामान्य बात है ॥4॥
 
"Father! This influence of mine is neither caused by any mantra or other mantras nor is it natural, rather, it is a normal thing for anyone in whose heart the Lord Shri Achyuta resides. ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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