श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.19.34 
प्रह्लाद उवाच
ममोपदिष्टं सकलं गुरुणा नात्र संशय:।
गृहीतं तु मया किन्तु न सदेतन्मतं मम॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
प्रह्लादजी बोले - पिताजी ! इसमें कोई संदेह नहीं है, गुरुजी ने मुझे ये सब विषय सिखाये हैं, और मैंने इन्हें समझ भी लिया है; परन्तु मेरा विचार है कि वे सिद्धान्त अच्छे नहीं हैं।
 
Prahladji said - Father! There is no doubt about this, Guruji has taught me all these subjects, and I have also understood them; but I think that those principles are not good.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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