श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.19.33 
श्रीपराशर उवाच
प्रणिपत्य पितु: पादौ तदा प्रश्रयभूषण:।
प्रह्लाद: प्राह दैत्येन्द्रं कृताञ्जलिपुटस्तथा॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
श्री पाराशर जी ने कहा - तब विनयभूषण प्रह्लाद जी ने अपने पिता के चरणों में प्रणाम किया और हाथ जोड़कर दैत्यराज हिरण्यकशिपु से कहा।
 
Shri Parashar Ji said - Then Vinaybhushan Prahlada ji bowed to his father's feet and with folded hands said to the demon king Hiranyakashipu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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