श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.19.32 
एतच्चान्यच्च सकलमधीतं भवता यथा।
तथा मे कथ्यतां ज्ञातुं तवेच्छामि मनोगतम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
यह सब और जो कुछ तुमने पढ़ा है, वह सब मुझे बताओ। मैं तुम्हारे मन की बात जानने के लिए बहुत उत्सुक हूँ ॥ 32॥
 
Tell me all this and whatever else you have read. I am very eager to know what is in your mind. ॥ 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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