कथं मन्त्रिष्वमात्येषु बाह्येष्वाभ्यन्तरेषु च।
चारेषु पौरवर्गेषु शङ्कितेष्वितरेषु च॥ ३० ॥
अनुवाद
मन्त्रियों, दरबारियों, बाहरी और भीतरी महल के सेवकों, गुप्तचरों, नगरवासियों, संदिग्ध लोगों (जिन्हें जीतकर बलपूर्वक दास बना लिया गया हो) तथा अन्य लोगों के प्रति कैसा व्यवहार करना चाहिए?॥30॥
How should one behave towards the ministers, courtiers, outer and inner palace servants, spies, city dwellers, suspicious people (who have been conquered and forcibly made slaves) and other people?॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥