श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.19.3 
श्रीपराशर उवाच
एवं पृष्टस्तदा पित्रा प्रह्लादोऽसुरबालक:।
प्रणिपत्य पितु: पादाविदं वचनमब्रवीत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर जी बोले - जब उनके पिता ने उनसे ऐसा पूछा, तब राक्षस पुत्र प्रह्लाद ने उनके चरणों में प्रणाम करके यह कहा -॥3॥
 
Shri Parashar ji said - When his father asked him this, the demon son Prahlada bowed to his feet and said this -॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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