श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.19.25 
क्षीणासु सर्वमायासु पवने च क्षयं गते।
जगाम सोऽपि भवनं गुरोरेव महामति:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जब वायु तथा सभी भ्रम क्षीण हो गए, तब बुद्धिमान प्रह्लाद अपने गुरु के घर गए।
 
After the wind and all the illusions had thus been weakened, the wise Prahlada went to his Guru's house.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)