श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.19.2 
हिरण्यकशिपुरुवाच
प्रह्लाद सुप्रभावोऽसि किमेतत्ते विचेष्टितम्।
एतन्मन्त्रादिजनितमुताहो सहजं तव॥ २॥
 
 
अनुवाद
हिरण्यकशिपु ने कहा— हे प्रह्लाद! तुम बड़े प्रभावशाली हो! क्या तुम्हारे ये कर्म मंत्रों के कारण हैं या स्वाभाविक हैं?॥ 2॥
 
Hiranyakashipu said— Oh Prahlad! You are very impressive! Are these actions of yours caused by mantras or are they natural?॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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