श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.19.18 
समाहितमतिर्भूत्वा शम्बरेऽपि विमत्सर:।
मैत्रेय सोऽपि प्रह्लाद: सस्मार मधुसूदनम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
परंतु हे मैत्रेय! शम्बरासुर के प्रति पूर्णतया द्वेषरहित होकर प्रह्लादजी सावधान मन से भगवान श्रीमधुसूदन का स्मरण करते रहे॥18॥
 
But, O Maitreya! Remaining completely free from any hatred towards Shambarasura, Prahladji kept remembering Lord Shrimadhusudan with a careful mind. 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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