श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.19.15 
हिरण्यकशिपुरुवाच
नास्माभि: शक्यते हन्तुमसौ दुर्बुद्धिबालक:।
मायां वेत्ति भवांस्तस्मान्माययैनं निषूदय॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हिरण्यकशिपु ने कहा, "यह मूर्ख बालक कोई जादू जानता है, जिससे हम इसे नहीं मार सकते। इसलिए तुम्हें इसे जादू से ही मारना होगा।"
 
Hiranyakshipu said, "This foolish boy knows some magic by which we cannot kill him. Therefore, you must kill him by the magic only."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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