श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.19.14 
ततो विलोक्य तं स्वस्थमविशीर्णास्थिपञ्जरम्।
हिरण्यकशिपु: प्राह शम्बरं मायिनां वरम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तब उसे बिना किसी हड्डी या पसली के स्वस्थ देखकर दैत्यराज हिरण्यकशिपु ने परम मायावी शम्बरासुर से कहा ॥14॥
 
Then seeing him healthy without any broken bone or rib, the demon king Hiranyakashipu said to the supreme illusionist Shambarasur. 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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