श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.19.12 
ततस्तं चिक्षिपु: सर्वे बालं दैतेयदानवा:।
पपात सोप्यध: क्षिप्तो हृदयेनोद्वहन्हरिम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तब उन सब दैत्यों और दानवों ने उसे महल से नीचे फेंक दिया और उनके धक्के से वह भी हृदय में श्री हरि का स्मरण करता हुआ नीचे गिर पड़ा॥12॥
 
Then all those demons and devils threw him down from the palace and due to their push he too fell down while remembering Shri Hari in his heart. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)