श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 19: प्रह्लादकृत भगवत्-गुण-वर्णन और प्रह्लादकी रक्षाके लिये भगवान‍्का सुदर्शनचक्रको भेजना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.19.10 
श्रीपराशर उवाच
इति श्रुत्वा स दैत्येन्द्र: प्रासादशिखरे स्थित:।
क्रोधान्धकारितमुख: प्राह दैतेयकिङ्करान्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले - यह सुनकर अपने महल की ऊपरी मंजिल पर बैठे हुए दैत्यराज क्रोधित हो गए और अपने दैत्य अनुयायियों से बोले।
 
Shri Parashara said - On hearing this the king of demons, sitting on the upper floor of his palace, became furious and said to his demon followers.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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