श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.18.6 
अविकारं स तद्भुक्त्वाप्रह्लाद: स्वस्थमानस:।
अनन्तख्यातिनिर्वीर्यं जरयामास तद्विषम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
और भगवान् के नाम के प्रभाव से शांत हुए विष को पीकर और उसे बिना किसी विकार के पचाकर मनुष्य स्वस्थ चित्त रहता है ॥6॥
 
And after consuming the poison that has become subdued due to the influence of God's name and digesting it without any disorder, one remains in a healthy state of mind. 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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