श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  1.18.45 
पुरोहिता ऊचु:
दीर्घायुरप्रतिहतो बलवीर्यसमन्वित:।
पुत्रपौत्रधनैश्वर्यैर्युक्तो वत्स भवोत्तम:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
पुरोहितों ने कहा - हे पुत्र! तुम बहुत श्रेष्ठ हो। तुम दीर्घायु हो, कलह से रहित हो, बल और वीर्य से युक्त हो तथा पुत्र, पौत्र, धन और ऐश्वर्य से युक्त हो। 45॥
 
The priests said – O son! You are very excellent. May you live long, be free from conflict, be full of strength and semen and be blessed with sons, grandsons and wealth and opulence. 45॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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