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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति
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श्लोक 40
श्लोक
1.18.40
यथा सर्वेषु भूतेषु सर्वव्यापी जगद्गुरु:।
विष्णुरेव तथा सर्वे जीवन्त्वेते पुरोहिता:॥ ४०॥
अनुवाद
‘सर्वव्यापी जगद्गुरु भगवान विष्णु सब प्राणियों में विद्यमान हैं’ – इस सत्य के प्रभाव से ये पुरोहित जीवित हों ॥40॥
‘The omnipresent Jagadguru Lord Vishnu is present in all living beings’ – may these priests come alive with the influence of this truth. 40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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