श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.18.4 
श्रीपराशर उवाच
ते तथैव ततश्चक्रु: प्रह्लादाय महात्मने।
विषदानं यथाज्ञप्तं पित्रा तस्य महात्मन:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
श्री पाराशर जी बोले - तब उन रसोइयों ने महात्मा प्रह्लाद को उनके पिता की आज्ञा के अनुसार विष दे दिया।
 
Shri Parashar Ji said - Then those cooks gave poison to Mahatma Prahlad as per the orders of his father.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd