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श्लोक 1.18.4  |
श्रीपराशर उवाच
ते तथैव ततश्चक्रु: प्रह्लादाय महात्मने।
विषदानं यथाज्ञप्तं पित्रा तस्य महात्मन:॥ ४॥ |
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| अनुवाद |
| श्री पाराशर जी बोले - तब उन रसोइयों ने महात्मा प्रह्लाद को उनके पिता की आज्ञा के अनुसार विष दे दिया। |
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| Shri Parashar Ji said - Then those cooks gave poison to Mahatma Prahlad as per the orders of his father. |
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