श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.18.39 
प्रह्लाद उवाच
सर्वव्यापिन् जगद्‍रूप जगत्स्रष्टर्जनार्दन।
पाहि विप्रानिमानस्माद्दु:सहान्मन्त्रपावकात्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
प्रह्लादजी कहने लगे - हे सर्वव्यापी, विश्वरूप, जगत् रचयिता जनार्दन! इस मन्त्ररूपी अग्नि से इन ब्राह्मणों की समस्त दु:खों और संतापों से रक्षा कीजिए॥39॥
 
Prahladji started saying – Oh omnipresent, universal form, world creator Janardan! Protect these Brahmins from all the sorrows and sorrows with this fire of mantra. 39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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