प्रह्लादजी कहने लगे - हे सर्वव्यापी, विश्वरूप, जगत् रचयिता जनार्दन! इस मन्त्ररूपी अग्नि से इन ब्राह्मणों की समस्त दु:खों और संतापों से रक्षा कीजिए॥39॥
Prahladji started saying – Oh omnipresent, universal form, world creator Janardan! Protect these Brahmins from all the sorrows and sorrows with this fire of mantra. 39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥