श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.18.35 
तत्तस्य हृदयं प्राप्य शूलं बालस्य दीप्तिमत्।
जगाम खण्डितं भूमौ तत्रापि शतधा गतम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
परन्तु बालक की छाती पर लगते ही वह तेजोमय त्रिशूल टूटकर सैकड़ों टुकड़ों में विभक्त होकर पृथ्वी पर गिर पड़ा ॥35॥
 
But as soon as it struck the boy's chest, the effulgent trident broke and fell on the earth, breaking into hundreds of pieces. ॥ 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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