श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.18.33 
श्रीपराशर उवाच
इत्युक्तास्तेन ते क्रुद्धा दैत्यराजपुरोहिता:।
कृत्यामुत्पादयामासुर्ज्वालामालोज्ज्वलाकृतिम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले: ऐसा कहते ही दैत्यराज के पुरोहित क्रोधित हो गए और उन्होंने अग्नि की ज्वाला के समान प्रज्वलित शरीर वाले एक प्राणी की रचना की।
 
Sri Parashara said: At his saying so, the priests of the king of demons became angry and created a being with a body blazing like a flame of fire.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd