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श्लोक 1.18.32  |
कर्मणा जायते सर्वं कर्मैव गतिसाधनम्।
तस्मात्सर्वप्रयत्नेन साधुकर्म समाचरेत्॥ ३२॥ |
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| अनुवाद |
| सब कुछ कर्म से ही उत्पन्न होता है और कर्म ही उनकी शुभ-अशुभ गतियों का साधन है। अतः मनुष्य को पूर्ण प्रयत्नपूर्वक केवल शुभ कर्म ही करने चाहिए ॥32॥ |
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| Everything is created because of karma and karma is the means of their good and bad movements. Therefore, one should perform only good karma with full effort. ॥ 32॥ |
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