श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.18.32 
कर्मणा जायते सर्वं कर्मैव गतिसाधनम्।
तस्मात्सर्वप्रयत्नेन साधुकर्म समाचरेत्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
सब कुछ कर्म से ही उत्पन्न होता है और कर्म ही उनकी शुभ-अशुभ गतियों का साधन है। अतः मनुष्य को पूर्ण प्रयत्नपूर्वक केवल शुभ कर्म ही करने चाहिए ॥32॥
 
Everything is created because of karma and karma is the means of their good and bad movements. Therefore, one should perform only good karma with full effort. ॥ 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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