श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.18.31 
प्रह्लाद उवाच
क: केन हन्यते जन्तुर्जन्तु: क: केन रक्ष्यते।
हन्ति रक्षति चैवात्मा ह्यसत्साधु समाचरन्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
प्रह्लाद बोले, "कौन प्राणी किसके द्वारा मारा जाता है और कौन किसकी रक्षा करता है? आत्मा ही अच्छे और बुरे आचरणों के द्वारा अपनी रक्षा और नाश स्वयं ही करती है।" 31.
 
Prahlada said, "Which creature is killed by whom and who is protected by whom? The soul itself protects and destroys itself through good and bad practices." 31.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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