श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.18.29 
पुरोहिता ऊचु:
दह्यमानस्त्वमस्माभिरग्निना बाल रक्षित:।
भूयो न वक्ष्यसीत्येवं नैव ज्ञातोऽस्यबुद्धिमान्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
पुरोहितों ने कहा - हे बालक ! हमने यह सोचकर तुझे अग्नि में जलने से बचाया था कि तू फिर ऐसी बात नहीं कहेगा । हम नहीं जानते थे कि तू इतना मूर्ख है ?॥29॥
 
The priests said - Oh boy! We saved you from burning in the fire thinking that you will not say such a thing again. We did not know that you are so foolish?॥ 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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