श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.18.24 
सम्पदैश्वर्यमाहात्म्यज्ञानसन्ततिकर्मणाम्।
विमुक्तेश्चैकतो लभ्यं मूलमाराधनं हरे:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
अतः धन, ऐश्वर्य, यश, विद्या, सन्तान, कर्म और मोक्ष - इन सबकी प्राप्ति का एकमात्र साधन श्री हरि का पूजन ही है ॥24॥
 
Therefore, wealth, opulence, greatness, knowledge, progeny, deeds and salvation – the only source of all these can be attained is the worship of Shri Hari. 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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