श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.18.23 
तत्तत्त्ववेदिनो भूत्वा ज्ञानध्यानसमाधिभि:।
अवापुर्मुक्तिमपरे पुरुषा ध्वस्तबन्धना:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
कुछ अन्य महापुरुषों ने ज्ञान, ध्यान और समाधि के द्वारा संसार के तत्त्व को जानकर उसके बंधन को काटकर मोक्ष प्राप्त किया है ॥23॥
 
Some other great men have attained salvation by severing the bondage of the world by knowing its essence through knowledge, meditation and samadhi. 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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