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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति
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श्लोक 22
श्लोक
1.18.22
मरीचिमिश्रैर्दक्षाद्यैस्तथैवान्यैरनन्तत:।
धर्म: प्राप्तस्तथा चान्यैरर्थ: कामस्तथाऽपरै:॥ २२॥
अनुवाद
उन्हीं अनन्त से दक्ष, मरीचि आदि ऋषियों को धर्म, कुछ ऋषियों को अर्थ और कुछ ऋषियों को काम की प्राप्ति हुई ॥22॥
From that Anant alone, Daksha, Marichi and other sages got Dharma, some other sages got Artha and some others got Kama. ॥22॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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