श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.18.21 
धर्मार्थकाममोक्षाश्च पुरुषार्था उदाहृता:।
चतुष्टयमिदं यस्मात्तस्मात्किं किमिदं वच:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, ये मानव जीवन के चार पुरुषार्थ कहे गए हैं। जिनसे इन चारों की प्राप्ति होती है, उनका क्या उपयोग है? आपके इस कथन के विषय में क्या कहा जाए?॥ 21॥
 
Dharma (righteousness), Artha (wealth), Kama (desire) and Moksha (liberation) are called the four aims of human life. What is the use of those through which these four are achieved? What should be said about this statement of yours?॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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