श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.18.2 
हिरण्यकशिपुरुवाच
हे सूदा मम पुत्रोऽसावन्येषामपि दुर्मति:।
कुमार्गदेशिको दुष्टो हन्यतामविलम्बितम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
हिरण्यकशिपु ने कहा, "अरे शूद्रो! यह दुष्ट और दुष्ट बुद्धि वाला मेरा पुत्र भी दूसरों को बुरे मार्ग का उपदेश देता है, अतः तुम इसे शीघ्र मार डालो।"
 
Hiranyakshipu said, "Hey, you Sudras! This wicked and evil-minded son of mine also preaches evil ways to others, so you must kill him quickly."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd