श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.18.16 
गुरूणामपि सर्वेषां पिता परमको गुरु:।
यदुक्तं भ्रान्तिस्तत्रापि स्वल्पापि हि न विद्यते॥ १६॥
 
 
अनुवाद
और आपने जो कहा, उसमें मुझे तनिक भी संदेह नहीं है कि सभी गुरुओं में पिता ही परम गुरु है ॥16॥
 
And I do not have the slightest doubt about what you said, that among all Gurus, the Father is the Supreme Guru. ॥16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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