vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति
»
श्लोक 15
श्लोक
1.18.15
पिता च मम सर्वस्मिञ्जगत्युत्कृष्टचेष्टित:।
एतदप्यवगच्छामि सत्यमत्रापि नानृतम्॥ १५॥
अनुवाद
और मैं जानता हूँ कि मेरे पिता सम्पूर्ण जगत् में सबसे अधिक शक्तिशाली हैं। यह भी सर्वथा सत्य है, अन्यथा नहीं॥15॥
And I know that my father is the most powerful person in the whole world. This is also absolutely correct, not otherwise.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×