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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति
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श्लोक 15
श्लोक
1.18.15
पिता च मम सर्वस्मिञ्जगत्युत्कृष्टचेष्टित:।
एतदप्यवगच्छामि सत्यमत्रापि नानृतम्॥ १५॥
अनुवाद
और मैं जानता हूँ कि मेरे पिता सम्पूर्ण जगत् में सबसे अधिक शक्तिशाली हैं। यह भी सर्वथा सत्य है, अन्यथा नहीं॥15॥
And I know that my father is the most powerful person in the whole world. This is also absolutely correct, not otherwise.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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