श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.18.14 
प्रह्लाद उवाच
एवमेतन्महाभागा: श्लाघ्यमेतन्महाकुलम्।
मरीचे: सकलेऽप्यस्मिन् त्रैलोक्ये नान्यथा वदेत्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
प्रह्लाद बोले, "हे श्रेष्ठजनो! यह बात सत्य है। इस सम्पूर्ण त्रिलोकी में भगवान मिरिका का यह महान कुल निश्चय ही वंदनीय है। इसमें कोई भी कुछ गलत नहीं कह सकता।"
 
Prahlada said, "Oh great people! This is correct. In this entire Triloki, this great clan of Bhagwan Mirika is definitely praiseworthy. No one can say anything wrong in this." 14.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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