श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.18.13 
तस्मात्परित्यजैनां त्वं विपक्षस्तवसंहिताम्।
श्लाघ्य: पिता समस्तानां गुरूणां परमो गुरु:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
अतः आप विपक्षियों की प्रशंसा करना छोड़ दें। आपके पिता सब प्रकार से प्रशंसनीय हैं और वे सभी गुरुओं में परम गुरु हैं।॥13॥
 
Therefore, you should stop praising the opposition. Your father is praiseworthy in every way and he is the supreme Guru among all the Gurus. ॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)