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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति
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श्लोक 12
श्लोक
1.18.12
किं देवै: किमनन्तेन किमन्येन तवाश्रय:।
पिता ते सर्वलोकानां त्वं तथैव भविष्यसि॥ १२॥
अनुवाद
तुझे देवताओं की, अनंत की या अन्य किसी की क्या आवश्यकता है? तेरे पिता ही तेरे और समस्त लोकों के आधार हैं, तू भी वैसा ही होगा॥12॥
What need do you have of gods, the infinite or anyone else? Your father is the support of you and all the worlds, and you too shall be like that.॥12॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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