श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.18.11 
पुरोहिता ऊचु:
जातस्त्रैलोक्यविख्यात आयुष्मन‍्ब्रह्मण: कुले।
दैत्यराजस्य तनयो हिरण्यकशिपोर्भवान‍्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
पुरोहित ने कहा - हे आयुष्मान्! आप ब्रह्माजी के कुल में उत्पन्न हुए हैं, तीनों लोकों में विख्यात हैं और दैत्यराज हिरण्यकशिपु के पुत्र हैं। 11॥
 
The priest said – Hey Ayushman! You were born in the family of Brahmaji, famous in the three worlds, and are the son of the demon king Hiranyakashipu. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)