श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 18: प्रह्लादको मारनेके लिये विष, शस्त्र और अग्नि आदिका प्रयोग एवं प्रह्लादकृत भगवत्-स्तुति  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.18.10 
श्रीपराशर उवाच
सकाशमागम्य तत: प्रह्लादस्य पुरोहिता:।
सामपूर्वमथोचुस्ते प्रह्लादं विनयान्वितम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
श्री पाराशर जी बोले - तब पुरोहितगण बड़ी विनम्रता के साथ प्रह्लाद के पास गए और उन्हें शांतिपूर्वक बताया। 10.
 
Shri Parashar Ji said - Then the priests went to Prahlada with great humility and told him peacefully. 10.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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