श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  1.17.83 
एते भिन्नदृशां दैत्या विकल्पा: कथिता मया।
कृत्वाभ्युपगमं तत्र सङ्क्षेप: श्रूयतां मम॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
हे दैत्यों! मैंने तुम्हें भिन्न-भिन्न मतवालों के लिए भिन्न-भिन्न उपाय बताये हैं। अब तुम उनके संक्षिप्त एवं समन्वित विचार सुनो ॥ 83॥
 
O demons! I have told you the alternatives (different solutions) for people with different views. Now listen to their brief and coordinated views. ॥ 83॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)