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vishnu 1.17.80: जब यह सारा जगत् ताप से जल रहा है, तब इन दीन दुखी प्राणियों से घृणा करना कौन बुद्धिमान होगा? 80॥   |   vishnu अध्याय 1.17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  1.17.80 
तापत्रयेणाभिहतं यदेतदखिलं जगत्।
तदा शोच्येषु भूतेषु द्वेषं प्राज्ञ: करोति क:॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
जब यह सारा जगत् ताप से जल रहा है, तब इन दीन दुखी प्राणियों से घृणा करना कौन बुद्धिमान होगा? 80॥
 
When this whole world is burning with heat, then who would be wise to hate these poor miserable creatures? 80॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)