श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  1.17.79 
सर्वभूतस्थिते तस्मिन‍्मतिर्मैत्री दिवानिशम्।
भवतां जायतामेवं सर्वक्लेशान्प्रहास्यथ॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
दिन-रात तुम्हारा मन सर्वव्यापी प्रभु में लगा रहे और उनमें तुम्हारा प्रेम निरन्तर बढ़ता रहे; इस प्रकार तुम्हारे सब दुःख दूर हो जाएँगे ॥ 79॥
 
Let your mind be focused day and night on the All-Existing Lord and let your love for Him increase constantly; in this way all your sufferings will disappear. ॥ 79॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)