श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  1.17.76 
तस्माद‍्बाल्ये विवेकात्मा यतेत श्रेयसे सदा।
बाल्ययौवनवृद्धाद्यैर्देहभावैरसंयुत:॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
इसलिए विवेकशील पुरुष को चाहिए कि वह शरीर की बाल्यावस्था, युवावस्था और वृद्धावस्था को न देखकर, बाल्यावस्था में ही अपने कल्याण के लिए प्रयत्न करे ॥ 76॥
 
Therefore a prudent man should strive for his welfare in childhood itself, instead of looking at the stages of the body such as childhood, youth and old age. ॥ 76॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)