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vishnu 1.17.68: इस प्रकार जीवित रहते हुए तो महान दुःख भोगता ही है, मरने के बाद भी यम की यातनाएँ और गर्भ में प्रवेश करने की कठिन पीड़ा सहनी पड़ती है ॥68॥   |   vishnu अध्याय 1.17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित   ।   vishnu अंश 1: प्रथम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  1.17.68 
जन्मन्यत्र महद्दु:खं म्रियमाणस्य चापि तत्।
यातनासु यमस्योग्रं गर्भसङ्क्रमणेषु च॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार जीवित रहते हुए तो महान दुःख भोगता ही है, मरने के बाद भी यम की यातनाएँ और गर्भ में प्रवेश करने की कठिन पीड़ा सहनी पड़ती है ॥68॥
 
In this manner one suffers great misery while alive, and even after death one has to endure the tortures of Yama and the severe pain of entering the womb. ॥ 68॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)