श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  1.17.60 
क्षुत्तृष्णोपशमं तद्वच्छीताद्युपशमं सुखम्।
मन्यते बालबुद्धित्वाद्दु:खमेव हि तत्पुन:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
लोग मूर्खतापूर्वक भूख, प्यास और शीत की शांति को ही सुख समझते हैं, परन्तु वास्तव में वे दुःख ही हैं ॥60॥
 
People foolishly consider the peace of hunger, thirst and cold as happiness, but in reality they are only sorrow. 60॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)