श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 17: हिरण्यकशिपुका दिग्विजय और प्रह्लाद-चरित  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  1.17.58 
मृतस्य च पुनर्जन्म भवत्येतच्च नान्यथा।
आगमोऽयं तथा यच्च नोपादानं विनोद्भव:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
मृत्यु के बाद पुनर्जन्म होता है, यह नियम भी कभी नहीं जाता। इस विषय में आगम [श्रुति-स्मृति के रूप में] भी सिद्ध करते हैं कि भौतिक पदार्थों के बिना किसी वस्तु की रचना नहीं होती।* ॥58॥
 
After death there is rebirth, this rule also never goes away. In this matter the Agamas [in the form of Shruti-Smriti] also prove that without material things no thing is created * ॥ 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)